किसान 7वी दौर की वार्ता के लिए विज्ञान भवन पहुँचे

रिपोर्ट :- कशिश

नई दिल्ली :-केंद्र सरकार और किसानों के बीच 7वे दौर की वार्ता की शुरुआत होने से पहले उन किसानों को श्रद्धांजलि दिए जा रहे हैं। जिन्होंने आंदोलन के समय अपनी जान गवाई है।

कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच लगातार गतिरोध कायम है। जिसमें किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि तीनों कृषि बिल को वापस लिया जाए। लेकिन वही सरकार का कहना है कि यह बिल उनके पक्ष में है इसको वापस नहीं लिया जाएगा।

दिल्ली की कई सीमाओं पर 26 नवंबर से ही किसान लगातार आंदोलन करते हुए दिखाई दे रहे हैं और यह आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है।

किसान पहुंचे 7वे दौर की कृषि कानूनों के महत्वपूर्ण मुद्दे पर सोमवार को केंद्र सरकार औऱ किसान नेताओं के बीच 7वें दौर की वार्ता शुरू हुई। वार्ता शुरू होने से पहले आंदोलन में मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। किसान अभी भी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग पर डटे हुए हैं। दिल्ली में भारी बारिश और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद किसान सिंघु बॉर्डर समेत कई सीमाओं पर मोर्चेबंदी पर डटे हुए हैं। किसानों ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे 6 जनवरी से आंदोलन तेज करेंगे।

आखिरी दौर की बैठक में सरकार ने किसानों की दो मांगें मान ली थीं। सरकार ने बिजली संशोधन बिल को वापस लेने और पराली जलाने से रोकने के लिए बने वायु गुणवत्ता आयोग अध्यादेश में बदलाव का भरोसा किसान नेताओं को दिया था। हालांकि कृषि कानूनों पर पेंच फंसा हुआ है। किसान सितंबर से ही इन कानूनों का विरोध करते हुए आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली की कई सीमाओं पर किसान 26 नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं।

किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि वह बैठक में सरकार के सामने नया विकल्प नहीं रखेंगे। दरअसल, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पिछली बैठक में किसान संगठनों से अनुरोध किया था कि कृषि सुधार कानूनों के संबंध में अपनी मांग के अन्य विकल्प दें, जिस पर सरकार विचार करेगी। हालांकि, किसान नेताओं ने वार्ता से पहले कहा कि वह बैठक में सरकार के सामने कोई नया विकल्प नहीं रखेंगे. पिछली बैठक में शामिल किसान नेताओं ने कहा था कि सरकार ने संकेत दिया है कि वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। उसने इसे लंबी और जटिल प्रक्रिया बताया था।

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