शांत रहने का सबसे मुख्य बातें

रिपोर्ट:- प्रियंका झा

नई दिल्ली:-शांत रहने का सबसे मुख्य बातें एक फकीर था उसके शरीर में तीर घुस गया। इससे उसे बड़ी पीड़ा हो रही थी। तीर खींचने की कोशिश की जाए, तो हाथ लगाते ही पीड़ा और बढ़ जाती थी। इससे वह तीर खींचा भी नहीं जा सकता था। उस समय क्लोरोफॉर्म जैसी बेहोश करने वाली दवा भी नहीं थी। बड़ी समस्या खड़ी हो गई। पर जो लोग उस फकीर को जानते थे बोले, ‘तीर अभी मत निकालो। फकीर जब नमाज पढ़ने बैठेगा तब निकाल लेंगे।’

शाम को फकीर नमाज पढ़ने लगा। पल भर में ही उसका चित्त इतना एकाग्र हो गया कि उस दौरान जब उसके शरीर से तीर निकाला गया तो उसे पता भी नहीं लगा। कैसी जबरदस्त है यह एकाग्रता! सार यही है कि चित्त की एकाग्रता के बिना आप किसी काम में सफल नहीं हो सकते। यदि चित्त एकाग्र रहेगा तो सामथ्र्य की कमी न पड़ेगी। साठ वर्ष के बूढ़े होने पर भी किसी नौजवान की तरह आपमें उत्साह और सामथ्र्य दीख पड़ेगा। इंसान ज्यों-ज्यों बुढ़ापे की तरफ बढ़े, त्यों-त्यों उसका मन अधिक मजबूत होता जाना चाहिए।

फल को ही देखिए न! पहले वह हरा होता है, पकता है, सड़ता, गलता और मिट जाता है पर भीतर का बीज उत्तरोत्तर कड़ा होता जाता है। शरीर भले ही बूढ़ा होता चला जाए, पर स्मरण शक्ति तो बढ़ती ही रहनी चाहिए। पर ऐसा होता नहीं। मनुष्य कहता है- आजकल मेरी स्मरण शक्ति कम हो गई है। क्यों? क्योंकि बुढ़ापा आ गया है। एकाग्रता रहे तो यह धारणा नहीं रहेगी। पर यह सधे कैसे? मन को बिल्कुल शांत करना बड़े महत्व की बात है। विचारों के चक्र को जोर से रोके बिना एकाग्रता होगी कैसे?

इसके लिए आपको बाहर के अपरंपार संसार से अपना ध्यान बंद करना होगा। अपनी ऊर्जा क्षुद्र बातों में खर्च नहीं करनी चाहिए। जैसे हम स्थूल विषयों में खर्च करते रहते हैं। साग अच्छा नहीं बना, इसमें नमक कम पड़ा, ऐसी बातों में हमारा ज्ञान खर्च हो जाता है। तात्पर्य यह है कि मन की अवस्था बदले बिना एकाग्रता नहीं है।

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