वर्ष 2008 में मचे आतंक की दहशत भरी चीखें अब जाकर शांत हुईं

रिपोर्ट :- शुभम कुमार

नई दिल्ली :-वर्ष 2008 में मचे आतंक की दहशत भरी चीखें अब जाकर शांत हुई हैं। अहमदाबाद सीरियम बम ब्लास्ट केस में विशेष कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष अदालत ने 49 में से 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने 11 अन्य दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इन लोगों को पहले ही दोषी करार दे दिया था और आज सजा का ऐलान किया।

स्वदेश माइक्रोब्लॉगिंग मंच, कू पर आज कोर्ट के इस फैसले की कई नेताओं आदि ने सराहना की है।

प्रसार भारती न्यूज़ सर्विसेस ने कू करते हुए कहा है:
यह विशेष अदालत 2005 के सीरियल बम विस्फोट मामले में 3 दोषियों में से अगर मौत की सजा सुनाती है।

Koo AppA special court pronounces death sentence to 38 out of 49 convicts in 2008 Ahmedabad serial bomb blast case.Prasar Bharati News Services (@pbns_india) 18 Feb 2022

भाजपा के सोशल मीडिया सह-संयोजक मनन दानी ने कू के माध्यम से कहा:
“सत्यमेव जयते”
अहमदाबाद विस्फोट मामले में 49 दोषियों में से 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने का फैसला काबिले तारीफ है।
“जय श्री राम”Koo App” સત્યમેવ જયતે ” અમદાવાદ બ્લાસ્ટ કેસમાં 49 દોષિતોમાંથી 38ને ફાંસીની સજા અને 11 આરોપીને આજીવન કેદ ની સજા આપવાનો નિર્ણય એ આવકાર્ય અને સરાહનીય છે. ”જય શ્રી રામ”🚩Manan Dani (@MananDaniBJP) 18 Feb 2022

गुजरात के भाजपा अध्यक्ष सी आर पाटिल कू करते हुए कहा:
अहमदाबाद विस्फोट मामले में 49 दोषियों में से 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस फैसले से न्यायपालिका ने एक मिसाल कायम की है। मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं।Koo Appઅમદાવાદ બ્લાસ્ટ કેસમાં 49 દોષિતોમાંથી 38ને ફાંસીની સજા અને 11 આરોપીને આજીવન કેદની સજાનો ઐતિહાસિક ચુકાદો આવ્યો છે. ન્યાયતંત્રએ આ ચુકાદાથી એક કડક દાખલો બેસાડ્યો છે. આ ચુકાદાને આવકારું છું.C R Paatil (@CRPaatil) 18 Feb 2022

Koo Appઅમદાવાદ બ્લાસ્ટ કેસમાં 49 દોષિતોમાંથી 38ને ફાંસીની સજા અને 11 આરોપીને આજીવન કેદની સજાનો ઐતિહાસિક ચુકાદો આવ્યો છે. ન્યાયતંત્રએ આ ચુકાદાથી એક કડક દાખલો બેસાડ્યો છે. આ ચુકાદાને આવકારું છું. View attached media contentC R Paatil (@CRPaatil) 18 Feb 2022

राष्ट्रवादी तथा भाजपा कार्यकर्ता गिरिराज सिंह ने कू के माध्यम से कहा:
ऐतिहासिक वराडिक्ट – हमीदाबाद विस्फोट मामले में 3 दोषियों को मौत की सजा।
परिचित नामKoo AppHistoric Verdict – Death sentence to 38 convicts in Ahmedabad blast case. Familiar Names View attached media contentGiriraj Singh (@girirajsingh) 18 Feb 2022

मालूम हो कि वर्ष 2008 में इन धमाकों की गूंज से पूरा देश हिल गया था। इस सीरियल ब्लास्ट मामले में 2 फरवरी को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन 30 जनवरी को ही स्पेशल कोर्ट के जज एआर पटले कोरोना संक्रमित हो गए और इस मामले पर फैसला 8 फरवरी तक टल गया।

26 जुलाई 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार कुल 21 ब्‍लास्‍ट हुए थे। दिल दहला देने वाली यह सबसे बड़ी घटना थी, जिसने सबको हिलाकर रख दिया था। देश में इतने कम समय में इतने धमाके पहले कभी नहीं हुए थे। एक घंटे के अंदर अहमदाबाद में एक दो-नहीं, बल्कि पूरे 21 धमाके हुए। इस मामले में अहमदाबाद पुलिस ने 20 प्राथमिकी दर्ज की थी, जबकि सूरत में 15 अन्य प्राथमिकी दर्ज की गईं।

अदालत की ओर से सभी 35 प्राथमिकी को मर्ज करने के बाद मुकदमा चलाया गया। दरअसल पुलिस ने अपनी जांच में इस बात का दावा किया था कि सभी एक ही साजिश का हिस्सा थे। ऐसे में सभी प्राथमिकी को मिलाकर केस की सुनवाई शुरू की गई।

अदालत ने इस मामले में सजा सुनने के दौरान 49 दोषसिद्ध आरोपियों में से 48 पर दो लाख 85 हजार रुपए (प्रत्येक) का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने इस घटना के सभी 56 मृतकों के लिए एक-एक लाख रुपए, 240 घायलों में से गम्भीर के लिए 50-50 हजार और हल्के के लिए 25-25 हजार के मुआवजे का भी प्रावधान किया। ज्ञातव्य है कि यहाँ सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल समेत 23 भीड़भाड़ वाले स्थानों पर उस दिन शाम साढ़े छह बजे से पौने आठ बजे के बीच धमाके हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हुई थी और 240 लोग घायल हुए थे। इसके बाद उसी साल 28 से 31 जुलाई के बीच सूरत शहर से 29 वैसे ही बम बरामद हुए थे, जैसे अहमदाबाद के धमाकों में इस्तेमाल किए गए थे।

गुजरात पुलिस की जांच के बाद इस मामले में 15 अगस्त 2008 को पहले 11 लोगों को पकड़ा गया। बाद में अन्य अभियुक्तों की भी गिरफ्तारी हुई थी। जांच के दौरान पता लगा कि इन धमाकों के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआई, अंडरवर्ल्ड और प्रतिबंधित संगठन सिमी से परिवर्तित हुए इंडियन मुजाहिदीन और अन्य आतंकी संगठनों का हाथ था। इन लोगों ने कथित तौर पर 2002 के गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया था। जांच में यह भी पता चला था कि इस घटना के लिए मई में अहमदाबाद के निकट वटवा इलाके में षड्यंत्र रचा गया था।

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