ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम – 11 नवम्बर 2021 भावी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश


रिपोर्ट :- अंजली सिंह

नई दिल्ली :-मैं ब्लूमबर्ग को भारत में 25 वर्षों की उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए अपनी बात शुरू करना चाहूंगा। 1996 मेंभारत सिर्फ 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था था, जिसकी आबादी एक अरब से कम थी। आज जब भारत आजादी के 75 साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है,तो मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम विकास के उस असाधारण दौर के कगार पर हैं, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र ने अब तक हासिल किया है।

अब से लगभग 25 वर्षों बाद, भारत की जनसंख्या 1.6 बिलियन पर हो जाएगी, जो अब तक की सबसे बड़ी आबादी होगी और जिसकी औसत आयु 40 वर्ष से कम होगी। इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि अगर राष्ट्र स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का सामाजिकीकरण करने में सफल हो जाते हैं तो राष्ट्रों को इस युवा आबादी से बहुत लाभ होता है।। ये वही विकास है जिसे वर्तमान सरकार ने अपनी विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं के जरिये गति प्रदान की है। हालांकि परिणाम रातोंरात नहीं दिखाई देंगे, लेकिन मेरा मानना है कि आज से लेकर 2050तक के समय के बीच, भारत किसी भी देश के मुकाबले अब तक के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी जनसांख्यिकीय लाभ का सृजन करेगा, जिसका अर्थ वैश्विक मामलों में अग्रणी भूमिका निभाने की बढ़ी हुई जिम्मेदारी होगी।

इस अग्रणी भूमिका की शुरुआत अवश्य ही सस्टेनेबिलिटी हासिल करने के प्रयास से होनी चाहिए। यह अब एक आवश्यक चुनौती है, जिसके लिए पूरे देश को एकजुट होना चाहिए। ग्लासगो में आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, सीओपी 26 से पहले ही, मैंने कहा था कि इंक्रिमेंटल ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने की तत्काल आवश्यकता पर ध्यान देने वाले बिजनेस अगले कई दशकों के दौरान सबसे बड़े अवसर प्रदान करेंगे। उत्सर्जन को सीमित करते हुए विकास को संतुलित करना, अनुकूलन के लिए तैयारबिजनेस के लिए एक अविश्वसनीय वैश्विक अवसर हैं। हालांकि आज देखें तो आसान समाधान आ+++सानी से उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी हम एक उदाहरण के रूप में कोविड महामारी के अपने अनुभवों कोले सकते हैं। शुरुआती उथलपुथल के बाद, हम किसी भी अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से समस्या पर ध्यान देने और उसका समाधान करने के लिए एकजुट हुए। दुनिया के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में कोरोनावायरस के टीके बनाने के लिए सीमाओं के पार जाकर सहयोग किया। वैज्ञानिकों को इस कार्य में एक वर्ष से भी कम समय लगा, जबकि सामान्य रूप से पांच वर्ष लग सकते थे। जब मानव जाति अस्तित्वगत खतरे का सामना कर रही थी, ऐसे वक्त में वैज्ञानिकों की सफलता मुझे पहले से कहीं अधिक आशावादी बनाती है और उम्मीद जगाती है कि विज्ञान अंततः जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर विजय हासिल कर लेगा। लेकिन अब यह हम पर निर्भर है कि हम तात्कालिकता, विश्वास के साथ और न्यायसंगत समाधानों पर ध्यान देते हुए विज्ञान का समर्थन करें।

पारिस्थितिक आपदा को टालने के इस गंभीर प्रयास में दुनिया भारतीय नेतृत्व का उपयोग कर सकती है। सस्टेनेबिलिटी संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड किसी भी अन्य प्रमुख राष्ट्र की तुलना में बेहतर है। पेरिस में सीओपी 21 में, भारत ने वादा किया था कि2030 तक, वह अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 33-35% तक कमी लाएगा और गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के अपने हिस्से को 40% तक बढ़ा देगा। हमने दोनों लक्ष्यों को हासिल कर लिया है, जिसमें दूसरे लक्ष्य को तो तय समय से नौ साल पहले ही हासिल कर लिया। यह कुछ और नहीं भी हो तो भी इस बात का तो पर्याप्त प्रमाण है कि भारत संभवतः नई और अधिक महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताओं को हासिल करेगा जिनकी घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सीओपी 26 में की थी।

हालांकि, हम मानते हैं कि यह आसान नहीं होगा। हर राजनेता और बिजनेस लीडर को ऐसे निर्णय लेने पड़ेंगे जो उनसे मौजूदा नियमों में परिवर्तन करने के साथ-साथ मौजूदा बिजनेस मॉडल में भी बदलाव की मांग करते हैं। इसे उस डिजिटल स्पेस में आने वाले व्यवधानों के साथ जोड़ दें, जिसने हर क्षेत्र को अपने दायरे में समेट लिया है तो हमारे सामने लगभग एकदम सही परिस्थिति मौजूद है। यह परिस्थिति कई बड़े बहुराष्ट्रीय व्यवसायों के पतन का कारण बनेगा, और उनकी जगह केवल सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के तालमेल से पैदा हुईं नई मल्टी ट्रिलियन डॉलर की कंपनियां लेंगी। दूसरे शब्दों में, हरित दुनिया को सक्षम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य के डिजाइन और कार्यान्वयन दोनों के लिए मुख्य रूप से सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल इनोवेशन दोनों की जरूरत पड़ेगी।

आइए, मैं अदाणी ग्रुप के नजरिए से अपनी बात समझाता हूं।

हम इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करते हैं जो ‘गतिशीलता’ को सक्षम बनाता है। और इस दुनिया में जो कुछ भी गतिशील है उसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल होना चाहिए – चाहे वह ऊर्जा का प्रवाह हो, माल का प्रवाह हो, लोगों का प्रवाह हो या डेटा का प्रवाह हो। पिछले वर्षों में, हमने अपने बिजली से संबंधित व्यवसायों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स व्यवसायों, हवाई अड्डे और परिवहन व्यवसायों और डेटा-सेंटर से संबंधित व्यवसायों के जरिये इन सभी प्रवाहों में खुद को स्थापित किया है। जलवायु परिवर्तन संबंधित दायित्व और अधिकार-पत्र इन व्यवसायों मं से हर एक को नए बाजार के अवसरों और एडजासेंसीज का पता लगाने और उनका निर्माण करने की सुविधा प्रदान करेगा। इसे प्रभावी ढंग से करने के लिए, हम अपने वर्तमान बिजनेस मॉडल पर पुनर्विचार कर रहे हैं और इसे फिर से डिज़ाइन कर रहे हैं। जब हम व्यवसाय के उन निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, जिनके लिए हमें अनुकूलन करने और तेजी से सीखने की आवश्यकता होती है तो मैं जटिलताओं को पहचान पाता हूं। लेकिन यही अनिश्चितता है, और यही तेज विकास है जो चीजों को दिलचस्प बनाये रखता है।

चलिए, मैं कुछ खास उदाहरणों से बताता हूं कि कैसे नई मार्केट एडजासेंसीज तक हमारी पहुंच बन रही है।
जब ऊर्जा के प्रवाह की बात आती है, तो अब यह निर्विवाद है कि बिजली का प्राथमिक स्रोत ग्रीन यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। हालांकि, वास्तविक वैल्यू क्रिएटर्स ग्रीन इलेक्ट्रॉन का संगहण करेंगे और ट्रांसमिशन ग्रिड में इसकी क्षणभंगुरता को स्वीकार करने के बजाय, वे इलेक्ट्रॉन को दूसरे रूप में सूचीबद्ध करेंगे –इस मामले में एक स्पष्ट संभावना हाइड्रोजन के रूप में है। यह मौजूदा वैल्यू चेंस सहित कई व्यवसायों को बाधित करेगा, जिनमें रसायन, धातु और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। अदाणी के नजरिए से, हम दुनिया के सबसे कम खर्चीले हाइड्रोजन का उत्पादन करने की मजबूत स्थिति में हैं, और उम्मीद है कि यह हाइड्रोजन उन विभिन्न उद्योगों के लिए ऊर्जा स्रोत और फीडस्टॉक का काम करेगा, जिनमें काम करने का हमारा इरादा है।

जब माल और लोगों की आवाजाही की बात आती है, तो यह साफ है कि परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी तरह से पुनर्गठन होगा। ऑनबोर्ड बैटरी, फ्यूल सेल, हाइड्रोजन या मेथनॉल द्वारा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े का मतलब है कि आंतरिक दहन इंजन का चलन बंद हो जाएगा और इसका अर्थ यह भी है कि दुनिया भर में नए इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। चाहे वह हवाई जहाज के लिए टिकाऊ (सस्टेनेबल) एविएशन फ्यूल का उत्पादन करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर होया परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जलयानों के लिए, लॉजिस्टिक्स वैल्यू चेन के हर हिस्से को बदलने और फिर से डिजाइन करने की आवश्यकता होगी। जहां अर्थशास्त्र में अब भी सुधार की जरूरत है, वहीं उम्मीद की किरण यह है कि हरित परिवहन के समाधान संभव हैं। वास्तव में, अदाणी ग्रुप ने पहले ही शुरुआत कर दी थी और हमारे पोर्टफोलियो में तेजी से पर्यावरण-अनुकूल हरित बंदरगाह, हरित हवाई अड्डे, हरित बिजली और हरित ट्रांसमिशन शामिल हो चुके हैं। इसने हमें कई अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों का पसंदीदा पार्टनर बनने की स्थिति में ला दिया है, जो भारत के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की सेवा करने की चाह में, हरित इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे के लिएभारत की तरफ देख रहे हैं।

डेटा प्रवाह के मामले में तो यह अपरिहार्य है कि बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चरअब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा-खपत करने वाला उद्योग बन जाएगा। क्लाउड स्टोरेज एप्लिकेशन सपोर्ट से लेकर डेटा बैकअप तक, और नेटवर्किंग से लेकर वेबसाइट होस्ट करने तक, तकनीक से संचालित होने वाली आधुनिक दुनिया को चलाने में डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग और 5जी के आगमन के साथ तेजी से वृद्धि होगी। यह अनुमान लगाया गया है कि 2025 मेंविकसित दुनिया में एक व्यक्ति हर 20 सेकंड में किसी एक डेटा सेंटर के साथ एक इंटरएक्शन करेगा। जैसे-जैसे 5जी कनेक्टिविटी एंटरप्राइज़ नेटवर्क का विस्तार करेगी और डेटा प्रोसेसिंग में तेजी आएगी, हमें डेटा सेंटर डिजाइनों को फिर से तैयार करने की आवश्यकता पड़ेगी। डेटा सेंटर्स के निर्माण, डेटा सेंटर्स को जोड़ने और डेटा सेंटर्स को 100% हरित बिजली प्रदान करने की अपनी क्षमता को देखते हुए अदाणी ग्रुप इस प्रवृत्ति से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, जो एक ऐसा प्रावधान है जिसे दुनिया में कहीं और आर्थिक पैमाने पर दोहराना कठिन होगा।

अदाणी में, हम रिन्यूएबल एनर्जी को जीवाश्म ईंधन का एक व्यवहारिक, किफायती विकल्प बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। दावोस 2020 में अपनी सोच जाहिर करने के बाद से, हमने केवल 30 महीनों की अवधि में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर एनर्जी डेवलपर बनकर अपनी गंभीरता को साबित किया है। उम्मीद है कि 2030 तकहम बिना किसी शर्त या बाधा के दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बन जाएंगे – और ऐसा करने के लिए हमने अगले दशक में 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है। ऐसी कोई अन्य कंपनी नहीं है जिसने अभी तक अपनी सस्टेनेबिलिटीइंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर इतना बड़ा दांव लगाया हो।

इसलिए हम मानते हैं कि हमारी रिन्यूएबल क्षमता और हमारी इन्वेस्टमेंट साइज साथ मिलकर हमें सस्ती हरित बिजली और हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के प्रयास में सभी वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अग्रणी स्थिति में रखते हैं। वैश्विक सर्वसम्मति देखते हुए लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हरित हाइड्रोजन एक वरदान साबित होगी। यह एक चमत्कारिक ईंधन और एक चमत्कारी फीडस्टॉक है। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत की तेज वृद्धि को देखें तोसस्ते में हरित हाइड्रोजन का उत्पादन भारत को हरित ऊर्जा के नेट एक्सपोर्टर में बदल सकता है। कल्पना करें कि एक ऐसा भारत है जिसे अब आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा,एक ऐसा भारत है जो अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रभाव में नहीं है, और एक ऐसा भारत है जिसने ईंधन स्वतंत्रता हासिल कर ली है। और हम इस कल्पना को ही अपने देश में संभव बनाने के लिए मदद करना चाहते हैं।

इसके लिए, अदाणी ग्रुप डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चरके क्षेत्र में भी बड़ा निवेश कर रहा है। डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सूचना, रीयल-टाइम डेटा और ऊर्जा दक्षता तक हमारी पहुंचको काफी बेहतर बनाते हैं। विज्ञान को आज बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमताओं की आवश्यकता है और कंप्यूटिंग क्षमताओं को क्लाउड आधारित डेटा सेंटर्स की आवश्यकता है और डेटा सेंटर्स भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं। हम मानते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में भारत की तेज प्रगति और अंततः स्वच्छ बिजली उत्पादन की हमारी क्षमता हमें न केवल भारत के, बल्कि शायद दुनिया के अधिकांश डेटा का भंडारण करने के लिए सबसे बड़ा हरित विकल्प बना देगी – और ‘एक सूरज, एक दुनिया, एक ग्रिड’ के सिद्धांत के साथ जोड़ेगी, जिसका उल्लेख हाल ही में सीओपी 26 में किया गया है।

जैसाकि उम्मीद है, ऐसा कहने वाले लोग भी होंगे कि भारत, और अन्य राष्ट्र, आवश्यकता के अनुसार तेजी से हरित, सस्टेनेबल दुनिया में परिवर्तित नहीं हो सकते। लेकिन मैं इससे असहमत हूं। यह पहली बार नहीं है जब मानव जाति को अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ा है। आज हमारे पास विज्ञान की शक्ति, बढ़ती जागरूकता और वैश्विक सहयोग है, जिसके साथ, मुझे विश्वास है कि, हम इस संकट से भी उबरेंगे, और भारत पहले से कहीं अधिक मजबूत और प्रभावशाली होगा। विलुप्तिकरण की संभावना सामने होने पर सब कुछ संभव हो जाता है।

इसके अलावा, जो मुझे व्यक्तिगत रूप से रोमांचक लगता है, वह यह है कि अब हम विज्ञान के इतिहास के महान परिवर्तनकारी मोड़ पर खड़े हैं, जहां डिजिटल तकनीक स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मिलकर एक ऐसा बिजनेस मॉडल बनाने के लिए सक्रिय है जो अभी अज्ञात है, और जो लगभग असीमित पैमाने पर होगा। हमें प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता होगी, लेकिन भारत को एक महत्वपूर्ण लाभ है यह है कि हमारा मध्य वर्ग, हमारे युवा, हमारी डिजिटल क्षमता, और हमारी इंफ्रास्ट्रक्चरसंबंधी ज़रूरतें भविष्य के इस उद्योग का निर्माण और उपभोग दोनों करेंगी। हम इन चुनौतियों को कैसे लेते हैं, उसी पर अगले कई दशकों में होने वाले हमारे देश के विकास की नींव पड़ेगी और यह विकास ही भारत की कहानी को हम सभी के लिए, जिनको इसका हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है, काफी प्रेरक बनाएगा।

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