पांच बहनों का दुलारा भाई रिशांत महज 16 महीने में दुनिया से जाते जाते दो बच्चों को दे गया जिंदगी

16 महीने का रिशांत इस दुनिया से जाते जाते दो बच्चों को नई जिंदगी दे गया और आने वाले दिनों में आंखों की रोशनी भी देगा. यह पूरी कहानी महादान अंगदान से जुड़ी है….16 महीने का रिशांत अपने पांच बहनों के बाद इकलौता भाई था.रिशांत पूरे परिवार का दुलारा था एक दुर्घटना में ब्रेन डेड होने के बाद परिवार के लोगों ने डॉक्टरों के सुझाव पर रिशांत का अंग दान किया, जिससे दो बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकी।

महज चंद दिनों पहले का यह वीडियो रक्षाबंधन के दिन का है जब 16 महीने का रिशांत अपनी बहन से राखी बंधवा रहा था,, अपने माता-पिता के शादी के लगभग 21 साल बाद रिशांत इस दुनिया में आया था. रिशांत की पांच बहने है उसके बाद रिशांत का जन्म हुआ.नन्हा रिशांत पूरे परिवार का दुलारा था माता पिता और बहनों के आंखों का तारा था,, लेकिन रिशांत अब इस दुनिया में नहीं है,लेकिन उसने जाते-जाते दो बच्चों की जिंदगी बचा दी, 17 अगस्त को निशान छत पर गिर गया जिसके बाद उसके सर में गंभीर चोट आई. परिवार उसे अस्पताल लेकर गए प्राथमिक इलाज के बाद उसे एम्स के ट्रामा सेंटर ले जाया गया. एम्स के डॉक्टरों ने रिशांत के जान को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन आखिर में 24 अगस्त को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. उसके बाद से डॉक्टरों ने रिशांत के माता पिता और परिवार के लोगों को अंगदान के लिए उन से निवेदन किया. डॉक्टरों के निवेदन के बाद परिवार अंगदान के लिए तैयार हो गया जिसके कारण , डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन करके रिशांत का लीवर और किडनी दो बच्चों को लगाया जिससे उनकी जिंदगी बच गई वही आंख को आई बैंक में रखा गया है।

क्या भगवान कृष्ण रिशांत के रूप में इस धरती पर आए थे, जिन्होंने लोगों को अंगदान के लिए एक संदेश दिया है और रिशांत के मृत्यु के बाद भी भगवान कृष्ण के रूप में अन्य बच्चों के शरीर में जिंदा है ??? यह खबर भले ही विज्ञान से जुड़ा हो लेकिन कहीं ना कहीं इसके जो संदेश है वह आस्था से जुड़े हुए हैं. इस बात को एम्स के डॉक्टर भी मान रहे हैं क्योंकि रिशांत का जन्म की तारीख और मृत्यु का वक्त दोनों ही आध्यात्मिक तौर पर भगवान श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ा है. इस बात को विज्ञान भले ही ना माने लेकिन आज के दौर में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है और वही डॉक्टर कहीं ना कहीं इसे भगवान के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।

हमारे देश में अंगदान को लेकर बेहद कम जागरूकता है. डॉक्टरों के दिए गए आंकड़े के मुताबिक हमारे देश में अंगदान का प्रतिशत 1% भी नहीं है. जबकि हादसों के आंकड़े की बात कहें तो दुनिया में लगभग सबसे ज्यादा है. डॉक्टरों का कहना है कि अंगदान को लेकर के जागरूकता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम विभाग करते हैं लेकिन अभी भी भारत में अंगदान को लेकर बेहद कम जागरूकता है. हालांकि एम्स के डॉक्टरों ने अंगदान को लेकर एक मुहिम से चला रखी है जिसके मद्देनजर बात करें तो कुछ महीनों में ही एम्स अस्पताल में कई अंगदान हुए हैं जो कि आने वाले दिनों के लिए एक अच्छा संदेश है।

हमारे देश में छोटे बच्चे को अंगदान को लेकर जागरूकता उतनी नहीं है. एम्स के डॉक्टरों का मानना है की रिकॉर्डेड आंकड़ों की अगर मानें तो शायद रिशान 16 महीने की उम्र में अंगदान देने वाला सबसे कम उम्र का बच्चा है जिसने यह नेक काम किया है।

पांच बहनों का इकलौता दुलारा रिशान या फिर कहे तो भगवान कृष्ण के रूप में महज 1 साल के लिए धरती पर आया. रिशांत जो नेक काम करके गया है इससे समाज को जागरूक होने की जरूरत है. किसी भी हादसे में किसी व्यक्ति का ब्रेन डेड होने के बाद डॉक्टरों की सलाह पर अंगदान जरूर करें . क्योंकि किसी एक की जिंदगी जाते जाते कई लोगों की जिंदगी बचा सकता है. ऐसे नेक कार्य में हमारी और आपकी सबकी भागीदारी होनी चाहिए।

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