परिवर्तन ही संसार का नियम है”, भूल चले हैं इस कहावत को हम: अतुल मलिकराम

रिपोर्ट :- अंजली अवस्थी

नई दिल्ली :-हर दिन आगे बढ़ने के साथ-साथ पीछे छूट जाती हैं कई बातें, कई कहावतें, और महज़ कहानियाँ बनकर रह जाते हैं वो तमाम मुहावरें, जो हमारे बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं। “परिवर्तन ही संसार का नियम है….” कभी तो यह एक दिन में कई बार कही जाने वाली कहावत थी, और आज हम इसका अर्थ ही भूल चले हैं। अब तो यह बात देश के नोट भी कहने लगे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर नोटों की रुपरेखा में बदलाव करता है। गाँधी जी से पहले, नोटों पर जानवर, बांध, संसद भवन, अंतरिक्ष उपग्रह आदि मुद्रित हुआ करते थे। तमाम बड़े परिवर्तनों के बाद, करीब 50 वर्षों से अब तक भारत के नोटों पर गाँधी जी की ही तस्वीर पेश की जा रही है, लेकिन आरबीआई ने आज तक इस तस्वीर में परिवर्तन का कोई इरादा नहीं दिखाया है। भारत माता की गोद में पले-बढ़े कई वीर सपूत ऐसे हैं, जिन्होंने भारत के हित में अनन्य कार्य करने के चलते देश की गरिमा को जीवंत रखा है। इन वीर पुरुषों का अमिट योगदान भारत की कर्मभूमि में अनंत काल तक गूंजता रहेगा। इसलिए परिवर्तन ही संसार का नियम है, पंक्ति को पुनः जीवंत करने का समय आ गया है, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और जेआरडी टाटा को भारत के नोटों पर स्थान देने का समय आ गया है।

महात्मा गाँधी हमारे देश के ‘राष्ट्रपिता’ हैं। भारतीय नोटों पर उनकी छवि भारतीय लोकाचार और मूल्यों को दर्शाती है। हम बहुत लंबे समय से नोटों पर गाँधी जी की छवि देख रहे हैं, यह गर्वित करने वाली बात है। लेकिन अन्य महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को पहचानने और सम्मान करने में कहीं न कहीं एक बड़ी कसर है, जिन्होंने भारत और इसके वासियों के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और जेआरडी टाटा ने जीवन पर्यन्त भारत वासियों को सरल जीवन देने और देश को बेहतर बनाने के लिए कड़ा संघर्ष किया, इसके साथ ही अटूट समर्पण, देशभक्ति और निष्ठा के साथ देश की सेवा की। भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस भारत माता के वीर योद्धा थे, जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी और शहादत हासिल की। उनके शक्तिशाली व्यक्तित्व ने ही भारतीयों को खुलकर जीने के लिए प्रेरित किया।

जेआरडी टाटा की प्रेरणा भी देश वासियों के लिए अविश्वसनीय है। उन्होंने टाटा ग्रुप के चैयरमेन के रूप में व्यवसायों और संस्थानों का निर्माण करके राष्ट्र की अमिट सेवा की। भारत की प्रगति में उनका योगदान अतुलनीय है। चाहे स्वास्थ्य क्षेत्र (टाटा मेमोरियल अस्पताल) हो या वैज्ञानिक क्षेत्र (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च), जेआरडी टाटा ने समृद्ध भारत के निर्माण में कोई कमी नहीं रखी। जिस गति से भारत ने तरक्की की है, सबसे बड़े हाथों में से एक हाथ जेआरडी टाटा का है, जिन्होंने हमें व्यवसाय को बुलंदियों पर पहुँचना सिखाया।

मुद्रा यानी नोटों पर दी जाने वाली इन छवियों का मूल उद्देश्य देश की संस्कृति, मूल्यों और जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करना है। भारतीय नोटों पर जेआरडी टाटा, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे दिग्गजों की छवियों का उपयोग करना एक प्रगतिशील भारत की ताकत और समृद्धि का प्रतीक होगा। नोटों पर गाँधी जी की तस्वीर के साथ ही इन महान विभूतियों को भी स्थान दिया जाना आवश्यक है। यह भारतीयों को भी भारत माता की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा, जैसा कि राष्ट्र के इन वीर पुरुषों ने किया। यह परिवर्तन नई पीढ़ी को देश के गौरव से रूबरू कराने में कारगर सिद्ध होगा, साथ ही उनके अंतर्मन में भी देशभक्ति की अमिट भावनाओं का सैलाब लाने में मदद करेगा, क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।

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