दिल्ली सरकार का ‘रोजगार बजट’ सिर्फ झूठ का पुलिंदा है-आदेश गुप्ता

रिपोर्ट :- नीरज अवस्थी

नई दिल्ली:- दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल सरकार का बजट एक झूठ का पुलिंदा है। नए बजट में रोजगार देने का बड़े-बड़े दावें करने वाली केजरीवाल सरकार ने साल 2015 में 8 लाख रोजगार देने की बात कही थी, फिर 10 लाख रोजगार देने की बात कही गई और अब रोजगार देने की संख्या 20 लाख हो गई है लेकिन सच्चाई यह है कि अभी तक सिर्फ 440 रोजगार ही केजरीवाल सरकार दे पाई है जिसका जवाब केजरीवाल सरकार द्वारा ही एक आरटीआई के जवाब में दिया गया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने बजट में आगामी वित्त वर्ष में 3062 करोड़ रुपये सामाजिक पेंशनों के लिए अवंटित करने की बात की गई है जबकि गत 2 वर्ष से दिल्ली वालों को सामाजिक पेंशन नहीं मिल रही और अवंटित राशि से लगभग दुगुनी राशि तो बकाया पेंशन बन गई है। उप मुख्य मंत्री मनीष सिसोदिया ने बजट मे इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर फ्री बिजली वितरण का दायरा बढ़ाने एवं 20 प्रतिशत जल उत्पादन बढ़ाने का दावा किया है। वास्तविकता यह है की सरकार लोगों को यमुना पेयजल नही बोरिंग के कच्चे पानी की सप्लाई बढ़ा कर अपनी पीठ थपथपा रही है।

श्री आदेश गुप्ता ने कहा कि जहाँ तक फ्री बिजली वितरण बढाने की बात है यह केजरीवाल सरकार की वोट बैंक स्कीम है जिसका लाभ लगभग 20 प्रतिशत कनेक्शन धारियों को हो रहा है और इसकी कीमत महंगी बिजली दर एवं भारी शुल्क देने वाले दुकानदार, उधोग एवं मध्यम वर्ग के घरेलू उपभोक्ता चुका रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा के बड़े दावे करने वाली सरकार ने साईंस म्यूजियम एवं नये बोर्डिंग बनाने की बजट में बात की है जब कि वर्तमान में 75 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में साईंस पढाने का प्रावधान ही नही। 745 स्कूलों में प्राध्यापक नहीं तो 415 में उपप्रधानाध्यापक नहीं हैं। दिल्ली सरकार के स्कूलों में लगभग 24000 स्कूल शिक्षकों के पद खाली हैं तो 22000 गेस्ट टीचर्स नियमितीकरण की बाट जोह रहे हैं।

श्री गुप्ता ने कहा कि अगले वर्ष दिल्ली को 20 लाख रोजगार का वादा बजट मे है जबकि गत 7 साल में 7000 रोजगार देने मे भी केजरीवाल सरकार विफल रही है। केजरीवाल सरकार बजट मे कर्मचारी ऑडिट की बात कर रही है पर दिल्ली जल बोर्ड के लापता 60000 करोड़ रुपये का ऑडिट कराने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि डी.टी.सी. का बस बेड़ा खत्म कर चुकी दिल्ली सरकार बस टर्मिनलों को फूड हब बना कर जमीनों का पिछले दरवाज़े से निजीकरण करना चाह रही है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि दिल्ली सरकार का यह बजट आम लोगों एवं दिल्ली के संसाधनों से छलावा है।

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