ग्रामीण सेवा में नहीं दिखता कोरोना का डर

रिपोर्ट:- कशिश

नई दिल्ली: ग्रामीण सेवा में नहीं दिखता कोरोना का डर
दिल्ली में चलने वाली ग्रामीण सेवा में लोगों में नहीं दिखता करोना कर डर। आपको बता दें कि जहा एक तरफ बस में 20 लोगों से ज्यादा बैठने की अनुमति नहीं है वहीं रोड पर चलने वाले ग्रामीण सेवा में लोग चिपक चिपक कर बैठ जाते है, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग बिल्कुल नहीं दिखती और साथ ही ग्रामीण सेवा को चलाने वाला भी पैसे कमाने के चक्कर में ढेर सारे लोगों को बिठा लेता है और लोगों को काम पर हो रही देरी की वजह से बैठना पड़ता है।


जहां जगह 4 लोगों की है वही 6 से 7 लोग बैठे दिखाई दे रहे हैं और कोरोना महामारी के चलते जितनी सोशल डिस्टेंसिंग रखी जाए उतना बेहतर है लेकिन ग्रामीण सेवा में ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देता साथ ही बस की कम संख्या होने के वजह से भी लोगों को ग्रामीण सेवा का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन कहीं ना कहीं ग्रामीण सेवा में दो या तीन लोगों के बैठने चाहिए वही छह-सात लोगों को बिठा के पैसे कमा रहे हैं और यह सरकार की विभिन्न दिशानिर्देशों के खिलाफ है लेकिन इस पर कोई भी आवाज नहीं उठा रहा है ना ही उस में बैठने वाले लोग और ना ही उसको देखने वाला कोई और।


भरते वक्त भी लोग एक दूसरे से चिपक कर ही उतरते हैं क्योंकि इतनी जगह नहीं हो पाती के आसानी से निकला जा सके वहीं दो लोगो के निकलने के बाद चार लोग और बैठ  जाते हैं तो ऐसे करोना हमारी बढ़ने का सीधा खतरा बना हुआ है अब देखना होगा कि सरकार कब तक इस पर कोई एक्शन लेती है।

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