गांव से आए रोजगार की आस में रेहड़ी पटरी विक्रेताओ को प्रशासन और माफियाओं की सांठ गांठ का परिणाम झेलना पड़ रहा है

रिपोर्ट:- यश भारद्वाज

उत्तर प्रदेश:- नोएडा गांव से आए रोजगार की आस में रेहड़ी पटरी विक्रेताओ को प्रशासन और माफियाओं की सांठ गांठ का परिणाम झेलना पड़ रहा है। काफी सालों से प्रयास और इंतजार के बाद जब नोएडा प्राधिकरण द्वारा इन पटरी वालो को दो बाई दो जगह अलॉट हुई तो वहीं अब देखा यह जा रहा है कि रेडी पटरी वालो को अपनी रोजी-रोटी कमाने में परेशानी आ रही है। जब फिल्म सिटी में हमने देखा तो 20 अलॉट हुई जगाहों में से एक इकलौती पटरी खुली हुई दिखी। वही फ़िल्म सिटी में निर्धारित एक रेडी पटरी विक्रेता जिनका नाम गिरधारी सिंह है। उन्होंने बताया कि पहले स्थित जगह पर उनकी बिक्री 1500 से 2000 हो जाती थी। वही प्रशासन द्वारा निर्धारित जगह पर इनकी बिक्री 400 से 500 हो गई है और जहां यह पहले ग्राहकों से घिरे रहते थे वहीं अब यह ज्यादातर अकेले बैठे दिखाई देते हैं। वही उन्होंने बताया कि विक्रेताओ ने प्रशासन के साथ सांठ गांठ करके अपनी दुकानें पहले वाले स्थान पर स्थापित कर ली हैं जिसकी वजह से वो अकेले पड गए है। प्रशासन की इस ढील से गिरधारी सिंह जैसे पटरी वालो को अपनी रोजी रोटी खतरे में दिखाई दे रही है। रेडी पटरी वाले एक छोटी सी जगह पर अपनी रोजी रोटी के लिए एक पटरी लगा लेते हैं जिस पर अक्सर वे चाय,आमलेट,फल,सब्जियां बेच कर अपना गुजारा चला लेते हैं। नोएडा प्राधिकरण ने इसकी सहायता के लिए निर्धारित जगह पर हर पटरी वाले के लिए जगह निर्धारित की है पर वह जगह कम ग्राहकों और अलग-थलग होने के कारण इन पटरी वालों की कमाई में बहुत फर्क पड़ता दिखाई दे रहा है और इसी कारण से अधिकतर पटरी वालों ने प्रशासन के साथ सांठ गांठ करके अपने हिसाब से जगह निर्धारित कर ली है। जिस कारण से लगता है कि प्रशासन द्वारा बनाई गई व्यवस्था पर पटरी वालों को विश्वास नहीं है। ऐसा एक जगह नही बल्कि नोएडा में आने वाले काफी रेडी पटरी वालो की समस्या है।

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