केजरीवाल सरकार दिल्ली जल बोर्ड के सभी जोनल राजस्व कार्यालयों को करने जा रही फेसलेस- सत्येंद्र जैन

रिपोर्ट :- नीरज अवस्थी

दिल्ली जल बोर्ड की 20 से अधिक सेवाएं चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी ऑनलाइन, ऑनलाइन और एम-सेवा एप पर घर बैठे सेवाओं का लाभ ले सकेंगे दिल्ली के लोग

दिल्ली वासियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सेवाएं देने के लिए सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जाएगा- सत्येंद्र जैन

उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सुविधा प्रणाली को समझाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड के विभिन्न कार्यालयों में बनाए जाएंगे हेल्प डेस्क

यमुना को साफ करने और दिल्ली वालों को 24 घंटे साफ पानी पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने 49 पदों के बहाली को मंजूरी

नई दिल्ली :-केजरीवाल सरकार अब दिल्ली जल बोर्ड के सभी जोनल राजस्व कार्यालयों को फेसलेस करने जा रही है। इस संबंध में जल मंत्री एवं डीजेबी के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन ने सोमवार को उच्चाधिकारियों के साथ बोर्ड बैठक की। बैठक में पानी की बिलिंग प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही इसे और पारदर्शी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार बिलिंग सिस्टम में पहले से मौजूद खामियों को दूर कर रही है और इसी सिलसिले में अब ज़ोनल राजस्व कार्यालय (जेडआरओ) ऑफिस को पूरी तरह से फेसलेस बनाने जा रही है। इसके लिए ज़ोनल राजस्व कार्यालय (जेडआरओ) ऑफिस में होने वाले सभी कार्यों की पूरी प्रणाली को डिजिटल किया जाएगा।

इस प्रक्रिया के बाद दिल्ली के लोगों को लंबी लाइनों में लगने से छुटकारा मिल जाएगा और एक क्लिक में ऑनलाइन सभी काम हो सकेंगे। इस दौरान बोर्ड ने 49 पदों की बहाली को अपनी मंजूरी दे दी है, जो विभिन्न योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेंगे। इन योजनाओं में विशेष रूप से यमुना की सफाई और 24 घंटे जलापूर्ति जैसी योजनाए शामिल हैं। इन 49 पदों में 13 सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और 36 कार्यकारी इंजीनियर के पद शामिल हैं। इनके अलावा, दिल्ली जल बोर्ड ने यूपीएससी से नियुक्त किए जाने वाले असिस्टेंट इंजीनियर्स के 40 पदों को भी मंजूरी दी।

पिछली बैठक में डीजेबी के अधिकारियों को जल मंत्री ने निर्देश दिया था कि जो मीटर रीडर अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसे ही कई समस्याओं को हल करने के लिए दिल्ली सरकार अब दिल्ली जल बोर्ड के सभी प्रणालियों को ऑनलाइन करने रही है। जिससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और काम पहले से और आसान हो जाएगा। इस ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण अब उपभोक्ता घर बैठे अपनी समस्याओं का समाधान कर सकेंगे।

जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड की सारी सेवाएं अब फेसलेस होगी। उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि अपने सभी समस्याओं के समाधान और दिल्ली जल बोर्ड की सारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन पोर्टल्स का उपयोग करें। दिल्ली जल बोर्ड की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है। अब ज़ोनल राजस्व कार्यालय (जेडआरओ ) को योजनाबद्ध तरीके से बंद कर सारी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाएगी। दिल्ली जल बोर्ड उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सुविधा प्रणाली को समझाने के लिए अपने विभिन्न कार्यालयों में हेल्प डेस्क बनाएगी।

दिल्ली जल बोर्ड से अब यह सेवाएं ऑनलाइन प्रदान की जाएंगी-

  1. नए पानी/सीवर कनेक्शन के लिए आवेदन
  2. अनाधिकृत पानी कनेक्शनों के लिए आवेदन
  3. म्यूटेशन के लिए आवेदन
    4.कनेक्शन बंद करने के लिए आवेदन
  4. पुनः कनेक्शन लगवाने के लिए आवेदन
  5. वर्षा जल संचयन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन
  6. डीजेबी वाटर टैंकर के लिए आवेदन
  7. बोरवेल अनुमति के लिए आवेदन
  8. पता सुधार के लिए आवेदन
  9. पानी/सीवर बिल से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत
  10. सीवर कनेक्शन एवं अन्य सेवाओं के लिए आवेदन (मौजूदा कनेक्शन धारक के लिए )
  11. वर्षा जल संचयन प्रमाण पत्र डाउनलोड करना
  12. बिल देखें/प्रिंट करें।
  13. शेष राशि और अंतिम रसीद देखें
  14. आवेदन की स्थिति को ट्रैक करें
  15. सरकारी आवासों के संबंध में कोई बकाया न होने पर एनओसी पत्र जारी करने का अनुरोध
  16. श्रेणी परिवर्तन के लिए अनुरोध
  17. परीक्षण मीटर के लिए अनुरोध
  18. पुराने जल कनेक्शन बदलने की अनुमति
  19. वर्षा जल संचयन संरचना के संबंध में सूचना

दिल्ली जल बोर्ड के सभी उपभोक्ता उपरोक्त सेवाओं के लिए केवल दिल्ली जल बोर्ड की वेबसाइट www-djb.gov.in या एमसेवा मोबाइल एप्लिकेशन पर जाकर ऑनलाइन आवेदन/पंजीकरण कर सकते हैं।

जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने डीजेबी के अधिकारियों को एक बैकएंड पोर्टल बनाने के निर्देश दिए, जिसमें तश्वीरों के विवरण के साथ बिलिंग हिस्ट्री, उसके साथ-साथ जेडआरओ द्वारा किए गए परिवर्तन भी इस पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। इसकी निगरानी दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। इससे व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता आएगी। जिससे सिस्टम में हेर-फेर की संभावना नहीं रहेगी।


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