किताब ‘द केस अगेंस्ट आईएमए’ आईएमए के लिए चुनौती, डॉक्टरों को मेरे सवालों का जवाब देना होगा: विश्वरूप रॉय चौधरी

रिपोर्ट :- अंजली सिंह

नई दिल्ली : अन्य चिकित्सा प्रणालियों का अभ्यास करके रोगियों का इलाज करने वालों के लिए तिरस्कार दिखाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पर तीखा हमला करते हुए, डॉ विश्वरूप रॉय चौधरी, गुरु मनीष, डॉ अमर सिंह आज़ाद और डॉ प्रवीण कुमार ने मंगलवार को ‘द केस अगेंस्ट आईएमए’ का अनावरण किया, जो तर्कों से भरी एक किताब है जिसमे उठाये गए सवालों का चौधरी ने आईएमए के डॉक्टरों से जवाब माँगा है ।

डॉ चौधरी ने पुस्तक विमोचन के बाद मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि ”यह पुस्तक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा मेरे खिलाफ प्राकृतिक चिकित्सा आधारित बीमारियों के गैर-आक्रामक उपचार करने के लिए दर्ज की गई पुलिस शिकायत के लिए एक उपयुक्त प्रतिक्रिया है। मैंने पुस्तक के माध्यम से आईएमए को कई चुनौतियों प्रदान की है। आईएमए को लोगों की सेवा करने के लिए काम करना चाहिए दवा कंपनियों और डॉक्टरों के गिरोह के संकीर्ण हितों की सेवा करने के लिए नहीं। उन्हें दूसरों के अच्छे कार्यों और शब्दों की भी सराहना करनी चाहिए, और तथ्य आधारित आलोचना को स्वीकार करना चाहिए।

पुस्तक में 3 अलग-अलग खंडों के साथ 65 पृष्ठ हैं, और इसको डॉ बिस्वरूप रॉय चौधरी द्वारा लिखा गया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित चिकित्सा पोषण विशेषज्ञ हैं, जो आहार संबंधी हस्तक्षेपों का उपयोग करके मधुमेह के उपचार के क्षेत्र में काम करते हैं। पुस्तक को राजीव दीक्षित जयंती के अवसर पर जारी किया गया , जिसे एचआईआईएमएस – अस्पताल और एकीकृत चिकित्सा विज्ञान संस्थान द्वारा राष्ट्रीय सत्य दिवस के रूप में मनाया गया।

पुस्तक एलोपैथी डॉक्टरों और आईएमए के सामने चुनौतियां पेश करती है। आईएमए के साथ-साथ उसकी चिकित्सा बिरादरी के लिए एक चुनौती यह है कि क्या एलोपैथी चिकित्सक पिछले 50 वर्षों में किसी भी गुर्दे की विफलता के रोगी को पूरी तरह से ठीक करने में सक्षम हैं? यदि हां, तो वह मरीज कौन है और उन्होंने उसे कैसे ठीक किया है? किताब आईएमए से कोविड को लेकर भी प्रश्न प्रस्तुत करती है ‘क्या एलोपैथी में कोई दवा है जो कोविड को ठीक कर सकती है?’ यदि हाँ, तो उस दवा का नाम क्या है और यह रोग को कैसे ठीक करती है? यह किताब कोविड टीकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाती है, एक सवाल यह है कि क्या आईएमए द्वारा प्रस्तावित वैक्सीन बिल्कुल भी सुरक्षित है? यदि हाँ, तो प्रमाण देना आवश्यक है। आईएमए के लिए एक और चुनौती यह है कि क्या पिछले पचास वर्षों में इसने मधुमेह के एक भी मरीज को ठीक किया है? अगर ऐसा एक भी मरीज है तो कौन है वह मरीज जिसे आपने ठीक किया है?

गुरु मनीष, एक प्रसिद्ध आयुर्वेद और प्राकृतिक इलाज विशेषज्ञ, जिन्होंने शुद्धि वेलनेस क्लीनिक और अस्पताल की स्थापना की है और जो चंडीगढ़ के पास डेरा बस्सी में एचआईआईएमएस के सह-संस्थापक हैं, ने कहा कि डॉ बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक ‘द केस अगेंस्ट आईएमए’ एक ऐसा आईना है जिसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता।

गुरु मनीष ने कहा, “आईएमए को तथ्यों का सामना करना चाहिए और हमको निशाना बनाना बंद करना चाहिए।

गुरु मनीष ने कहा कि आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा ने पुराने रोगियों की सेवा करने में उल्लेखनीय काम किया है जिनका एलोपैथी चिकित्सक इलाज नहीं कर सकते थे। कोविड-19 के दौरान भी, इन चिकित्सा प्रणालियों ने अपनी प्रभावशीलता साबित की है। हमने सभी बीमारियों के मरीजों के इलाज के लिए प्रोटोकॉल को मंजूरी दी है। आईएमए को वास्तविकताओं का सामना करना चाहिए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित स्वस्थ भारत का विचार हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, जहां गैर-आक्रामक उपचार की प्रमुख भूमिका है।

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