एमसीडी में कागजों में कुत्तों का स्टेरलाइजेशन कर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है, दिल्ली के अंदर रोजाना लगभग 5 हजार लोगों को कुत्ता काटता है- सौरभ भारद्वाज

रिपोर्ट :- नीरज अवस्थी

नई दिल्ली:-आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा एमसीडी में कागजों में कुत्तों का स्टेरलाइजेशन कर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। दिल्ली के अंदर कम से कम रोजाना 5 हजार लोगों को कुत्ता काटता है। उत्तरी नगर निगम ने 2020-21 के अंदर डॉग स्टेरलाइजेशन के लिए 15 करोड़ का आवंटन किया औऱ इसके केंद्र बनाने के लिए 5 करोड़ का आवंटन किया। ऐसे में वो पैसा आखिर कहां गया। दिल्ली में आवारा कुत्तों की आबादी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में स्टेरलाइजेशन में भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए एमसीडी ने 2009 से इनका सर्वे करना बंद कर दिया है। एमसीडी ने कुत्ते काटने के आंकड़ो छुपाने के लिए अपने अस्पतालों में रेबीज की दवाई रखना बंद कर दी है। उन्होंने कहा कि कुत्तों के काटने के डर से बच्चों को बाहर पार्क में भेजना औऱ महिलाओं ने सैर पर जाना बंद कर दिया है। कॉलोनियों में लोग कुत्तों के आतंक से भयभीत हैं। भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता बताएं कि पिछले 15 सालों से अगर आवारा कुत्तों को स्टेरेलाइजेशन किया जा रहा है तो कुत्तों की आबादी क्यों बढ़ रही है?

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने आज पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित किया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के लोगों को विभिन्न मुद्दों पर जागरूक कर रही हैं कि क्या-क्या मामले और काम हैं, जो सीधे-सीधे नगर निगम के अंदर अंतर्गत आते हैं। दिल्ली में कई एजेंसी हैं जिसकी वजह से लोग कंफ्यूज रहते हैं कि पार्षद, एमएलए और सांसद की क्या-क्या जिम्मेदारी हैं। आवारा पशुओं, गलियों के अंदर घूमती हुई गायों का मामला पूरी तरीके से एमसीडी का है। एमसीडी का काम है कि इन पशुओं को पकड़ कर निर्धारित गौशालाओं में भेजे। जहां पर इन गायों के लिए दिल्ली सरकार बाकायदा पैसा देती है। इसके अलावा पार्किंग का मामला दिल्ली के अंदर यह बहुत ज्वलंत मुद्दा है। साधारण कॉलोनी से लेकर पॉश कॉलोनी तक हर जगह पार्किंग बहुत बड़ी समस्या है। पूरी दिल्ली के अंदर पार्किंग का इंतजाम और प्रबंधन करना एमसीडी का काम है।

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी आज आवारा कुत्तों का मुद्दा लेकर आयी है। कॉलोनियों में पता करें, यह लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी का मुद्दा हैं। किसी भी आरडब्लूए और कॉलोनी के लोगों से पता करें कि लोग किस चीज से परेशान हैं। आपको पता चल जाएगा कुत्ते काटने की समस्या इतनी बड़ी हो चुकी है कि लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भी नहीं भेज सकते हैं। पार्कों के अंदर अपने बच्चों को नहीं भेज पाते हैं। क्योंकि वहां गली के कुत्ते इतने खूंखार हो चुके हैं कि वह बच्चों, बड़ों, महिलाओं और बुजुर्गों पर बिना किसी उकसावे के हमला करते हैं। 17 दिसंबर को मोती नगर थाना क्षेत्र के अंदर नजफगढ़ रोड पर डीएलएफ के निकट डीडीए के पार्क के अंदर मां बाप ने अपने 3 साल के बच्चे को धूप में खेलने के लिए बिठाया। उस समय कई बच्चे खेल रहे थे। उस पार्क के अंदर आवारा कुत्तों ने उस 3 साल के बच्चे हमला कर दिया और उसको नोच खाया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इससे अंदाजा लगाइए कि एक बच्चे को मां-बाप की आंखों के सामने पार्क में कुत्तों ने नोच कर मार डाला। इससे समझ सकते हैं कि कितने लोगों को कुत्ते काटते होंगे।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में एमसीडी के अस्पतालों के अंदर हर रोज 225 लोग आते थे, जिनको कुत्तों ने काटा था। उसके बाद से एमसीडी के अस्पतालों में एंटीरेबीज की दवाई रखनी ही बंद कर दी। एमसीडी के अस्पताल में चले जाइए, सप्ताह में से 5 दिन दवाई नहीं होगी। इस तरह से एमसीडी ने अपने आंकड़ों को नियंत्रित किया कि दवाई रखनी ही बंद कर दी, जिससे लोग आना बंद कर देंगे। इससे आंकड़े के अंदर गड़बड़ी कर सकते हैं। नगर निगम ने 2009 में आखिरी सर्वे कराया, जिसके अंदर कुत्तों की संख्या करीब 5.60 लाख बताई थी।

एमसीडी प्राइवेट एनजीओ को करीब 750 से 1100 रुपए तक एक कुत्ते को स्टेरलाइज करने के लिए देती है, ताकि वह आगे बच्चे पैदा ना कर सके और उनकी आबादी ना बढ़ सके। यह एक साधारण सा तरीका है जो कि न्यायालय ने भी बताया कि आप इनको स्टेरलाइज कर दें। जिससे कुत्तों की जनसंख्या रुक जाएगी। इसके अंदर एमसीडी ने बड़ा भ्रष्टाचार है। कुत्तों का स्टेरलाइज मात्र कागजों में किया जाता है। क्योंकि कॉलोनी में कहीं पर भी देख लीजिए, कुत्तों की संख्या बढ़ रही है। हर सीजन के अंदर छोटे-छोटे पिल्ले नजर आ जाते हैं। उस चोरी को छुपाने के लिए एमसीडी ने 2009 से कुत्तों का सर्वे करना ही बंद कर दिया। क्योंकि अगर इनके सर्वे में यह आ जाएगा कि इस साल संख्या 5.50 लाख थी और अगले साल 6 लाख हो गई, तो एमसीडी के अधिकारियों से पूछा जाएगा कि 15 करोड़ रुपए का स्ट्रेलाइजेशन कर रहे हैं, वह पैसा कहां जा रहा है। इसलिए इन्होंने सर्वे करना बंद कर दिया।

उन्होंने कहा कि मैंने एलएनजेपी अस्पताल के एमडी से पूछा कि रोजाना कुत्ते काटने की कितने मामले आते हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना 120 से 130 मामले सिर्फ एक अस्पताल में कुत्ते काटने के आते हैं। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 2019 में रोज 1000 मरीज कुत्ते काटने के आते थे। किसी को यदि कुत्ता काटता है तो उसके अंदर बहुत कम लोग सरकारी अस्पतालों में जाते हैं। सब सोचते हैं कि कौन सरकारी अस्पताल में जाएगा और धक्के खाएगा। वहां पर दवाई मिलेगी भी या नहीं। ऐसे में आसपास के किसी डॉक्टर से इंजेक्शन लगवा लो।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि निजी अस्पतालों का डाटा छोड़ दीजिए, सिर्फ सरकारी अस्पतालों का भी आंकड़ा ले लीजिए। दिल्ली के अंदर कम से कम रोजाना 5000 लोगों को कुत्ता काटता है। किसी भी कॉलोनी के अंदर चले जाइए, वह आपको बता देंगे कि वहां ऐसा कुत्ता रहता है जो कि आपको आते-जाते काट लेगा। महिलाओं ने घरों से बाहर सैर पर जाना बंद कर दिया है। इसके ऊपर एमसीडी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में पिछले 1 साल के अंदर 38 मौतें रेबीज से हुई हैं। यह वह लोग हैं जिन्होंने टीका नहीं लगवाया होगा। उनको कुत्तों ने काटा होगा, हल्की सी खरोच आई होगी तो उन्होंने सोचा होगा कि छोड़ो, बाद में देखेंगे।

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि 28 मार्च 2018 को उत्तम नगर इलाके में एक जवान लड़के को घर में घुसकर काटा। उसको खींचते हुए बाहर निकाल लिया। अगस्त 2015 में 7 वर्षीय बच्चे को कुत्तों ने काटा और उसकी मौत हो गई। पहाड़गंज के अंदर एक नवजात बच्ची को कुत्ते ने काट काट कर उसको मार डाला। 2020-21 के अंदर एमसीडी ने डॉग स्टेरलाइजेशन के लिए सिर्फ उत्तरी नगर निगम ने 15 करोड़ का आवंटन किया। इसके केंद्र बनाने के लिए 5 करोड़ का आवंटन किया, वो पैसा कहां गया। कितने कुत्तों का स्टेरेलाइजेशन किया इसका कोई अंदाजा नहीं है कि और कोई डाटा नहीं है। प्रतिदिन इनके अस्पतालों में 125 से डेढ़ सौ मामले कुत्ते काटने के आते हैं। इनके तत्तकालीन उपमहापौर एसएस वाधवा की बंदर के काटने से छत से गिरकर मौत हुई थी।

उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि दिल्ली नगर निगम की कोई जवाबदेही नहीं है। अगर दिल्ली नगर निगम के अंदर कोई गड़बड़ है तो आप किससे कहेंगे औऱ किस को जिम्मेदार ठहराएंगे। इनके मेयर हर साल बदलते हैं। क्योंकि यह कभी किसी को बना देते हैं और कभी किसी को जिम्मेदारी दे देते हैं। इसके अलावा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष किसी भी पार्षद को बना देते हैं। उसकी खुद की कोई जवाबदेही नहीं है औऱ खुद का राजनीतिक कद इतना कम है कि आप उनसे क्या बात करेंगे और क्या अपेक्षा करेंगे कि वह आपकी किसी बात का जवाब देंगे। वह रोजाना आरोप लगाकर गायब हो जाते हैं। कोई गंभीर नेता नहीं है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली नगर निगम पूरी तरीके से एक फेसलेस संगठन है, इनकी कोई जिम्मेदारी और जवाबदेही नहीं है। दिल्ली के लोग इन छोटी-छोटी समस्याओं से बहुत परेशान हैं। हम आदेश गुप्ता जानना चाहते हैं कि पिछले 15 सालों के अंदर आवारा कुत्तों के लिए क्या किया। अगर 15 सालों से आवारा कुत्तों को स्टेरेलाइजेशन किया जा रहा है तो कुत्तों की आबादी क्यों बढ़ रही है। क्या इन्होंने किया कि इतने सारे लोगों को कुत्ते काट रहे हैं उनके लिए क्या कर रहे हैं।

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