अन्याय तथा अत्याचार किसी सभ्य समाज की निशानी नहीं

रिपोर्ट :-शक्ति शुक्ला

नई दिल्ली :-किसी पर भी अन्याय तथा अत्याचार किसी सभ्य समाज की निशानी नहीं हो सकती हैं. फिर समाज के एक बहुत बड़े भाग यानि स्त्रियों के साथ ऐसा करना प्रकृति के विरुद्ध हैं. नारी को भी वो सभी प्राकृतिक अधिकार हासिल है जो कि एक पुरुष को हैं. उन्हें अबला मानकर उन पर अत्याचार करने का आशय कायरता हैं.

आज किसी भी क्षेत्र में नजर उठाकर देखियें, नारियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रगति में समान की भागिदार हैं. फिर उन्हें कमतर क्यों समझा जाता है यह विचारणीय हैं. हमें उनका आत्मविश्वास बढाकर उनका सहयोग करके समाज की उन्नति के लिए उन्हें साहस और हुनर का सही दिशा में उपयोग करना चाहिए तभी हमारा समाज प्रगति कर पाएगा
जब एक लड़की किसी लड़के के साथ शादी करके अपने ससुराल में जाती है, तो वह वहां पर सभी से प्यार की उम्मीद करती है परंतु कभी-कभी उसकी इन उम्मीदों पर पानी फिर जाता है क्योंकि उसके ससुराल वाले विभिन्न कारणों से उसके ऊपर अत्याचार करना चालू कर देते हैं।

हालांकि कभी-कभी लड़कियों पर उनके खुद के घर में भी अत्याचार होता है परंतु खासतौर पर लड़कियों को शादी के बाद अनेक प्रकार के प्रतिबंध झेलने पड़ते हैं। कई बार दहेज कम लाने के कारण लड़कियों को उनके ससुराल वालों के द्वारा तंग किया जाता है और उन्हें मारा-पीटा जाता है।

इसके अलावा उन्हें तरह-तरह की यातनाएं भी दी जाती हैं। कई बार तो दहेज की मांग पूरी ना होने पर नारी को जान से भी मार दिया जाता है, हालांकि गवर्नमेंट ने नारी सुरक्षा के लिए कई कानून बनाए हैं परंतु फिर भी अपराध करने वालों को कानून का डर भी नहीं होता है और वह नारी को एक बंधुआ मजदूर की तरह परेशान करते हैं और हर प्रकार से उसका शोषण करते हैं।

हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि नारी भी एक इंसान है, इसलिए उसका सम्मान करना चाहिए फिर चाहे वह अपने घर की नारी हो या फिर दूसरे किसी घर की नारी हो को भी वो सभी प्राकृतिक अधिकार हासिल है जो कि एक पुरुष को हैं. उन्हें अबला मानकर उन पर अत्याचार करने का आशय कायरता हैं. आज किसी भी क्षेत्र में नजर उठाकर देखियें, नारियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रगति में समान की भागिदार हैं. फिर उन्हें कमतर क्यों समझा जाता है यह विचारणीय हैं।

इतना ही नही कभी-कभी किसी कारणवश किसी स्त्री का विवाह सफल ना हुआ और वह फिर से आगे बढ़ने का प्रयास करती है और वह फिर से अपने सपने सजने का प्रयास करती है लेकिन समाज में कुछ इस तरीके के इंसान होते हैं कि वह शुरू में तो इतना इतनी हमदर्दी दिखाते हैं कि उनसे सगा कोई नहीं होता लेकिन बाद में समय बीतते बीतते असली चेहरा सामने आता है और वह उसका स्विच उनका असली चेहरा सामने आता जाता हैकि वह उसका पूर्ण रूप से शोषण करके उसको मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देते हैं इस और खुद को अलग कर देते हैं इस तरीके इस तरह से इस्त्री हर तरह से टूट चुकी होती है और पुरुष उस चीज का बहुत ही फायदा उठाने में कामयाब रहता है आज भी हमारे हमारे समाज में कुछ ऐसे इंसान हैं जो किसी की भावनाओं के साथ खेल कर चले जाते हैं इस तरह की वारदात से आदमियों के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन स्त्रियां पूरी तरह से टूट जाती है क्योंकि उन्हें अपने को तैयार करने में बहुत टाइम लगता है मेरा सिर्फ यह निवेदन है कि इस तरीके के इंसानों को ना कभी छोड़ा जाए क्योंकि वह इस समाज के लिए बहुत ही घातक है वह एक स्त्री को छोड़कर दूसरी स्त्री की जिंदगी बर्बाद करने में पूर्णता हर तरह से सम्मिलित होते हैं।

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