किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता कहा हालात अभी तक नहीं बदले

रिपोर्ट :- प्रिंस बहादुर सिंह

नई दिल्ली :-सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई की, जिसपर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए किसान आंदोलन के हालात पर चिंता व्यक्त की है।

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ यह याचिका एक वकील ने दायर की है। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोर्ट उन किसानों की स्थिति को समझता है जो दिल्ली की सीमा पर विरोध कर रहे हैं और मौसम की खराब स्थिति का सामना कर रहे हैं।

वहीं केंद्र ने अदालत को बताया कि किसानों के साथ “स्वस्थ चर्चा” चल रही है जिसके बाद अदालत ने मामले को 11 जनवरी को आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि अच्छे अवसर हैं कि पार्टियां निकट भविष्य में एक निष्कर्ष पर आ सकती हैं और नए कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली दलीलों पर केंद्र द्वारा प्रतिक्रिया दाखिल करने से किसानों और सरकार के बीच बातचीत में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

कोर्ट ने कहा कि हम बातचीत को प्रोत्साहित करते हैं। पीठ ने कहा कि अगर आप चल रहे बातचीत प्रक्रिया की वजह से 11 जनवरी को मामले को स्थगित कर सकते हैं। किसान पिछले साल सितंबर में पारित कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी के पास सिंघू, टिकरी और गाजियाबाद सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

4 जनवरी को अंतिम दौर में यह वार्ता विफल रही क्योंकि किसान अपनी मांग से अड़े रहे कि कानूनों को खत्म कर दिया जाए। वही सरकार इस कानून को वापस लेने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही। सरकार ने किसानों को बिंदुवार बातचीत करने का विकल्प दिया था।

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