किसान आंदोलन: किसानों और सरकार की आज सातवें दौर की वार्ता

रिपोर्ट :- प्रिंस बहादुर सिंह

नई दिल्ली :-दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रतिनिधि नए साल में पहली बार केंद्र सरकार के सदस्यों के साथ बातचीत करेंगे। यह सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसानों की सातवें दौर की वार्ता होगी। किसानों को इस वार्ता में अपनी मांगो के पूरा होने की उम्मीद है।

यह 30 दिसंबर को चर्चा के छठे दौर के बाद की चर्चा होगी, इससे पहले बातचीत के दौरान दोनों पक्ष दो मुद्दों पर आम सहमति बना चुके हैं। बिजली की दरों में वृद्धि और स्टबल बर्निंग के लिए दंड जैसे कानून पर सरकार किसानों से सहमत हो चुकी है।

हालाँकि, किसान और सरकार की बैठकें जो पांच घंटे से अधिक समय तक हर बार चली लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिला।

तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए एक कानूनी गारंटी की मांग पर अभी भी केंद्र और किसान संगठनों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है। सरकार के साथ उनकी बातचीत के बाद, किसान नेताओं ने रविवार को अपनी मांगों को दोहराया था। किसान नेताओं ने कहा कि, “हमारी मांगें समान हैं। कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। दोनों संशोधनों को वापस लाने की जरूरत है और सरकार को सुनना चाहिए नहीं तो हमारा आंदोलन जारी रहेगा, ”।

भारत किसान यूनियन के सदस्य जगीर सिंह दलेवाल ने कहा यदि केंद्र के साथ सोमवार की वार्ता विफल हो जाती है, तो उन्होंने मॉल और पेट्रोल पंप बंद करने का भी आवाह्न किया है। अगले दौर की वार्ता की तैयारी के लिए कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने भी सप्ताहांत में काम किया। एक अधिकारी ने कहा कि सरकार “बेहद चिंतित है” और “सकारात्मक परिणाम” चाहती है।

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