85 साल से ज्यादा जीते हैं ऐसी सोच वाले लोग, एक गलती घटाती है उम्र

रिपोर्ट :- कशिश

नई दिल्ली :-इंसान की सकारात्मक सोच न सिर्फ उसे प्रगतिशील बनाती है, बल्कि उम्र भी बढ़ाती है. ‘दि बॉस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन’ ने बताया कि आखिर कैसे हमारा पॉजिटिव मेंटल एटिट्यूट लंबी उम्र से जुड़ा हुआ है. एक्सपर्ट्स का दावा है कि सकारात्मक सोच के साथ जीने वाले लोगों की आयु 85 वर्ष से ज्यादा होती है।

इस बात के साक्ष्य मौजूद हैं कि आशावादी सोच इंसान की जीवन रेखा को लंबा कर सकती है. ऐसी ही एक स्टडी में 69,744 महिलाओं और 1,429 पुरुषों को शामिल किया गया था, जिन्होंने अपनी पॉजिटिव सोच, ओवरऑल हेल्थ और आदतों के स्तर का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण को पूरा किया था।

इसमें महिलाओं की हेल्थ और सोचने के तरीकों को 10 साल तक मॉनिटर किया गया. जबकि पुरुषों की सेहत, आदत और सोचने के तरीकों को 30 साल तक फॉलो किया गया. आशावादी सोच के प्रारंभिक स्तर पर स्टडी में पाया गया कि खुशमिजाज़ लोगों की आयु सामान्य से औसतन 15 प्रतिशत ज्यादा होती है।

बहुत ज्यादा पॉजिटिव एटिट्यूट के साथ जीवन जीने वाले 70 प्रतिशत लोगों के 85 साल से भी ज्यादा जीने की प्रबल संभावना होती है. उम्र, शैक्षणिक योग्यता, क्रॉनिक डिसीज, डिप्रेशन, एल्कोहल का सेवन, एक्सरसाइज, डाइट और प्राइमरी केयर विजिट को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

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