सीएम तीरथ सिंह रावत ने दिया इस्तीफा, आज होगी विधायक दल की बैठक

रिपोर्ट :- दौलत शर्मा

नई दिल्ली :-उत्तराखंड में चार महीने के अंदर ही सरकार को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के बाद सीएम तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार देर रात राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले दिल्ली में तीरथ ने सांविधानिक संकट का हवाला देते हुए खुद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में पद छोड़ने की इच्छा जताई थी।

मुख्यमंत्री रावत को बुधवार को अचानक दिल्ली तलब किए जाने के बाद से ही सियासी कयासबाजी जोरों पर थी। बुधवार देर रात ही उनकी मुलाकात नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से हुई थी। बृहस्पतिवार को उन्हें देहरादून लौटने से रोक दिया गया था। मसला रावत के उपचुनाव को लेकर अटका हुआ था, जिनके आयोजन में जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम बचे होने की बाधा थी।

शुक्रवार को रावत दोबारा नड्डा से मिले। इस आधे घंटे की मुलाकात में उन्हें सांविधानिक संकट का हवाला देते हुए इस्तीफा देने का निर्देश दिया गया। इसके बाद तीरथ रावत ने नड्डा को पत्र लिख कर इस्तीफे का प्रस्ताव रखा। फिर दून लौटे तीरथ सिंह रावत ने प्रेस वार्ता की, लेकिन उसमें महज अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाकर चले गए। मीडियाकर्मियों के इस्तीफे के बारे में पूछने पर उन्होंने चुप्पी साध ली। फिर रात करीब सवा ग्यारह बजे वो राजभवन पहुंचे और राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संकट को देखते हुए मुझे लगा कि मेरे लिए इस्तीफा देना सही है। मैं केंद्रीय नेतृत्व और पीएम मोदी का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे सीएम बनने का मौका दिया था।

प्रेसवार्ता कर सबको चौंकाया


इससे पहले सीएम ने रात करीब दस बजे प्रेसवार्ता कर सबको चौंका दिया था। अटकलें थीं कि सीएम तीरथ प्रेसवार्ता में अपने पद से इस्तीफे का एलान कर सकते हैं। लेकिन इस दौरान उन्होंने बाकी किसी भी राजनीतिक मुुद्दे पर बोलने की बजाय अपनी सरकार के काम गिनाए। अब शनिवार को देहरादून में बीजेपी विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। सभी भाजपा विधायकों को 11 बजे तक बैठक में पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने कोविड को लेकर राहत देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विद्यालयी शिक्षा, संस्कृति एवं सूचना और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों में सहायता दी गई है। बड़ी संख्या में प्रदेश में रोजगार के लिए अवसर पैदा किए गए हैं। राजकीय विभागों में सीधी नियुक्ति के प्रयास किए गए हैं। कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए निशुल्क किताबें देने की योजना तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की विदाई तय होने के साथ ही सियासी हलकों में सबकी निगाहें उस चेहरे को तलाशने में लग गई हैं जिसके सिर प्रदेश की सत्ता का ताज सजेगा। भाजपा विधायक मंडल दल की बैठक में सीएम पद के दावेदार का नाम तय होना है। सियासी हलकों में जिन विधायकों के नाम तैर रहे हैं, उनमें कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत, राज्यमंत्री डॉ.धन सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल, पुष्कर सिंह धामी के नाम चर्चाओं में हैं।

महिला दावेदार के रूप में पार्टी विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की पुत्री ऋतु खंडूड़ी व राज्यमंत्री रेखा आर्य के नाम भी लिए जा रहे हैं। सियासी जानकार का कहना है कि सीएम पद के दावेदारों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को मजबूत दावेदारों के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं तीरथ से पहले सीएम रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को दोबारा सत्ता सौंपने की भी चर्चाए तेज हैं।

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