दिल्ली मेट्रो में उड़ती दिखी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

रिपोर्ट:- कशिश

नई दिल्ली:  दिल्ली मेट्रो में उड़ती दिखी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां जहां एक तरफ कोरोना महामारी के चलते 5 महीने बादली मेट्रो को खोल दिया गया था और पूरी ही सावधानी के साथ मेट्रो में सुविधाएं दी गई थी।

किसी भी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही है और लोग अच्छे से सफर कर पाए। वहीं अब दिल्ली मेट्रो में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती हुई दिखाई दे रही है भले ही लोग मेट्रो में दूरी बना कर बैठ कर खड़े रहते हैं लेकिन मेट्रो से  निकलते हैं तो उतरते व चढ़ते वक्त एक दूसरे से चिपके रेहते हैं। जिसके बीच में किसी भी तरह की सामाजिक दूरी नहीं होती है। किसी भी तरह के सिविल डिफेंस के कर्मचारी साथ ही पुलिस वाले वहां मौजूद नहीं होते। जो इस तरह के चीजों को रोक सके और लोगों को समझाएं कि किस तरीके से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है और दूरी बनाकर चलनी है।

जब मेट्रो शुरू की दिशा निर्देश जारी किए गए थे कि जब मैं तो शुरू होगी तो किस तरीके से का पालन करना है

दिल्ली मेट्रो ने कोरोना काल में मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों से भीड़भाड़ वाले समय से बचकर (ब्रेक द पीक) यात्रा करने की सलाह दी है।

जिससे वह सुविधाजनक यात्रा कर सकेंगे। इस संबंध में दिल्ली मेट्रो द्वारा गुरुवार को एडवाइजरी जारी की गई है। वहीं पहले की तुलना में ट्रेन में यात्रियों के सफर की क्षमता घटकर लगभग पांचवा हिस्सा रह गई है। राजधानी में दिल्ली मेट्रो का परिचालन सामाजिक दूरी के नियमों के साथ 7 सितंबर से यलो लाइन से शुरू हुआ था।

लेकिन सभी लाइनों पर मेट्रो की सेवा पूरी तरह से सामान्य 12 सितंबर से हुई थी। हाल के दिनों में सुबह और शाम दिल्ली मेट्रो के कुछ सेक्शन दिलशाद गार्डन से शास्त्री पार्क, मुंडका से कीर्ति नगर, कीर्ति नगर से मंडी हाउस, नया बस अड्डा से दिलशाद गार्डन, एस्कॉर्ट्स मुजेसर से बदरपुर सेक्शन पर क्षमता का उपयोग शत-प्रतिशत से अधिक हो रहा है।

जबकि कम-भीड़भाड़ वाले समय के दौरान इन्हीं सेक्शनों में क्षमता का उपयोग केवल 30-50 फीसदी के बीच हो रहा है। मेट्रो के अनुसार भीड़भाड़ वाले समय के दौरान यात्री यथासंभव अपने यात्रा समय में फेरबदल कर सकते हैं।

समाजिक दूरी बनाकर निर्बाध रूप से यात्रा कर सकते हैं। आने वाले दिनों में व्यस्ततम अवधि के दौरान अगर अन्य सेक्शनों पर भी यह कार्य पद्धति जारी रखी जाती है तो न केवल नियमित तरीके से प्रवेश के कारण स्टेशनों के बाहर लगने वाली लाइनें और लंबी होंगी। इससे सेक्शनों के बीच में ट्रेनों की शॉर्ट लूपिंग होगी और गेटों को बंद रखना पड़ेगा। जिससे यात्रा का समय बढ़ेगा और यात्रा के दौरान असुविधा होगी।

इस बदले परिदृश्य में बेहतर क्षमता के साथ सेवा उपलब्ध कराने के लिए डीएमआरसी ने भीड़भाड़ वाले समय में (पीक ऑवर) चलने वाली ट्रेनों के फेरे सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक बढ़ा दिए हैं।

जबकि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के दौरान कम-भीड़भाड़ वाले समय की संकल्पना समाप्त कर दी है। जिस दौरान ट्रेनों और ट्रिपों की संख्या कम थी। मेट्रो का कहना है कि जहां तक संभव हो सकें लोग अनावश्यक यात्राओं से बचे।

यात्री अपनी सुविधा के लिए भीड़भाड़ वाले समय से बचकर अपने कार्यालय, घर और अन्य कार्यों के लिए आने-जाने के समय को बदलें। मेट्रो सेवा बहाल होने के बाद से यात्रियों ने डीएमआरसी के साथ बहुत सहयोग किया है।

जिससे हाल के दिनों में लाइन क्षमता का उपयोग 9-10 लाख हुआ है, जो वर्तमान अपेक्षाओं तथा सोशल डिस्टेंसिंग की आवश्यकताओं के अनुरूप है।

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