दिल्ली सरकार ने 90 निजी अस्पतालों 60% सामान्य बेड और 42 निजी अस्पतालों को 80% आरक्षित बेड देने का दिया निर्देश

रिपोर्ट :- कशिश

नई दिल्ली:  दिल्ली सरकार ने 90 निजी अस्पतालों 60% सामान्य बेड और 42 निजी अस्पतालों को 80% आरक्षित बेड देने का दिया निर्देश दिल्ली सरकार ने 90 निजी अस्पतालों को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अपनी कुल क्षमता के 60 प्रतिशत बिस्तर आरक्षित करने का आदेश जारी किया है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि इससे कोरोना मरीजों  के उपचार के लिए निजी अस्पतालों में 2644 बिस्तर बढ़ जाएंगे। 

राजधानी में बीते कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। मामला गंभीर होता देख गृह मंत्रालय अब स्थिति को काबू करने के लिए सामने आ चुका है। हालांकि फिलहाल सबसे बड़ी दिक्कत दिल्ली में वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड की कमी बनी हुई। आधिकारिक आकंड़ों के अनुसार दिल्ली में करीब 60 अस्पतालों में वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड नहीं है। सरकार का कहना है कि मरीजों के हिसाब से बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। दिल्ली से बाहर के कई मरीज गंभीर हालत में यहां के अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं।

दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक कोरोना मरीजों के लिए 1328 वेंटिलेटर बेड हैं और इनमें से अधिकतर बेड भर  चुके हैं। चिंता की बात यह है कि दिल्ली के 40 अस्पतालों में बेड पूरी तरह भर चुके हैं। इन अस्पतालों में लेडी हार्डिंग, दीनदयाल उपाध्याय, एलएनजेपी जैसे सरकारी अस्पतालों से लेकर अपोलो, मैक्स, सरगंगाराम जैसे बड़े निजी अस्पताल भी शामिल हैं। वेंटिलेटर बेड के अलावा 85 फीसदी आईसीयू बेड भी भर चुके हैं।

कोरोना एप के मुताबिक बुधवार रात 12 बजे तक राजीव गांधी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में वेंटिलेटर वाले 200 आईसीयू बेड हैं और इनमें से एक भी खाली नहीं था। वहीं एलएनजेपी अस्पताल के 200 में केवल सात बेड खाली थे। कुछ ऐसी ही स्थिति दिल्ली के अन्य अस्पतालों की थी। इस बीच चिंता की बात यह भी है कि दिल्ली के कोविड-19 के अलावा अन्य मरीजों को समर्पित आईसीयू बेड में भी धीरे-धीरे कमी होती जा रही है।

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