जितिया पर्व का महत्व जाने व्रत का समय और उससे हम कुछ मुख्य बातें

रिपोर्ट:- प्रियंका झा

नई दिल्ली:- जितिया पर्व का महत्व जाने व्रत का समय और उससे हम कुछ मुख्य बातें ज‍ित‍िया पर्व संतान की सुख-समृद्ध‍ि के ल‍िए रखा जाने वाला व्रत है। इस व्रत में न‍िर्जला यानी क‍ि (बिना पानी के) पूरे दिन उपवास किया जाता है। यह पर्व आश्विन माह में कृष्ण-पक्ष के सातवें से नौवें चंद्र दिवस तक तीन द‍िनों तक मनाया जाता है। यह पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। इसके अलावा नेपाल के मिथिला और थरुहट में भी मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस बार कब है ज‍ित‍िया व्रत, क्‍या है इस व्रत की पूजा व‍िध‍ि, कथा और महत्‍व?

जितिया पर्व का समय पूजा विधि और महत्व बातें:-
तिथि का प्रारंभ 09 सितंबर बुधवार को दोपहर 01:35 बजे पर होगा। जो 10 सितंबर, गुरुवार दोपहर 03:04 बजे तक रहेगी। व्रती उदया तिथि की मान्यता के अनुसार यह व्रत 10 सिंतबर को रखेंगे। जितिया व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले जागकर स्‍नान करके पूजा करती हैं और फिर एक बार भोजन ग्रहण करती हैं और उसके बाद पूरा दिन निर्जला रहती हैं। दूसरे दिन सुबह स्‍नान के बाद महिलाएं पूजा-पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

व्रत के तीसरे दिन महिलाएं पारण करती हैं। सूर्य को अर्घ्‍य देने के बाद ही महिलाएं अन्‍न ग्रहण कर सकती हैं। मुख्‍य रूप से पर्व के तीसरे दिन झोर भात, मरुवा की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है। अष्टमी को प्रदोषकाल में महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती है। जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, अक्षत, पुष्प, फल आदि अर्पित करके फिर पूजा की जाती है। इसके साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से सियारिन और चील की प्रतिमा बनाई जाती है। प्रतिमा बन जाने के बाद उसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। पूजन समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुननी चाहिए। इस व्रत को करने से संतान की उम्र लंबी होती है और वह माता-प‍िता ही नहीं बल्कि पूरे कुल का नाम रोशन करता है।

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