जाल में कैसे फंसाते हैं फटाफट लोन देने वाले ऐप्स, क्या रखें सावधानी?

रिपोर्ट :- कशिश

नई दिल्ली: जाल में कैसे फंसाते हैं फटाफट लोन देने वाले ऐप्स, क्या रखें सावधानी?

मिनटों में लोन देने वाले ऐप्स के झांसे में आकर लोग बर्बाद हो रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे दक्षिण भारत के राज्यों में कई लोगों ने सुसाइड कर लिया है। यह असल में पूरा एक रैकेट है जिसमें कई चीनी नागरिक भी शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक बार-बार चेता रहा है, फिर भी लोग इनके जाल में फंस रहे हैं।

यह असल में पूरा एक रैकेट है, जिसमें चीन, इंडोनेशिया तक के नागरिक शामिल हैं और कई छापों में ऐसे लोग पकड़े भी गये हैं। इनमें ज्यादा अनाधिकृत लोग लगे हैं जिन्हें रिजर्व बैंक जैसे नियामक से लोन देने का अधिकार नहीं मिला है, इसके बावजूद वे खुलेआम मिनटों में लोन का ऑफर देकर लोगों को फंसा रहे हैं। हालत यह है कि एक परिवार के महीने के मोबाइल फोन-इंटरनेट बिल जितना कर्ज लेने पर कुछ नागरिकों को जान देनी पड़ रही है।

लॉकडाउन के दौरान अचानक ऐसे ऐप काफी एक्टिव हो गये, क्योंकि बहुत से लोगों की नौकरियां चली गयीं। रोज कमाने-खाने वाले करोड़ों लोगों के पास कोई काम नहीं रहा। ऐसे लोगों के लिए ये ऐप सहारा बनकर आए, लेकिन ये साधु के वेश में शैतान की भूमिका  निभा रहे हैं।

इसमें अक्सर ग्राहक से तीन महीने का बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड या पैन कार्ड की कॉपी लेकर तुरंत यानी कुछ मिनटों में ही लोन दे दिया जाता है। कई बार ऐसे कागजात न रहने पर भी लोन दे दिया जाता है। ऐसे ज्यादातर ऐप चीन के हैं और उनका किसी भी बैंक या गैर बैंकिंग संस्थान (NBFC) से कोई नाता नहीं है।

जब कर्जदार गूगल प्ले स्टोर से ऐसे ऐप डाउनलोड करते हैं तब ही यह शर्त स्वीकार कराई जाती है कि ऐप को उनकी पर्सनल डिटेल (जैसे फोटो गैलरी) और कॉन्टैक्ट लिस्ट साझा की जा रही है। जब कोई ग्राहक इस ऐप को डाउनलोड कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करता है तो उसके कुछ मिनटों के बाद ही उसके बैंक एकाउंट में रकम डाल दी जाती है। इसके बाद शुरू होता है एक दुष्चक्र।

ऐसे करीब 20-30 ऐप्स के टेलीकॉलर ग्राहक को फोन कर बताते हैं कि उनके अच्छे रिकॉर्ड की वजह से उनकी कंपनी भी उन्हें लोन देना चाहती है। वे बताते हैं कि उन्होंने जिस ऐप से लोन लिया है उससे उन्हें आपके अच्छे रिकॉर्ड का पता चला है। बहुत से ग्राहक इस लालच और जाल में फंस जाते हैं और बिना जरूरत भी ढेर सारा लोन लेते हैं।

ऐसे ऐप 30 से 35 फीसदी का सालाना ब्याज तो लेते ही हैं। उससे ज्यादा भयावह बात यह है कि वे ड्यू डेट पर लोन न मिलने पर प्रति दिन 3,000 रुपये तक की पेनाल्टी लगा देते हैं। इसकी वजह से ही कई ग्राहक दूसरे ऐप से लोन लेने के झांसे में फंस जाते हैं।

[  ] किस तरह से फसाते हैं लोगों को

• चंद मिनट की प्रक्रिया के बाद 1 हजार से 50 हजार तक का लोन 

• कर्ज भरने की मियाद 7 दिन से कुछ महीनों के भीतर तक 

• कोई इनकम प्रूफ नहीं मांगेंगे

• कर्ज तुरंत खाते में डालेंगे

इसके बाद इनके टेलीकॉलर और रिकवरी एजेंट इस तरह से लोगों को प्रताड़ित करते हैं कि उनका जीना हराम हो जाता है। यहां तक कि ये कंपनियां लोन लेने वाले लोगों के पर्सनल डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर देती हैं और इतने सामाजिक अपमान से क्षुब्ध होकर कई लोग आत्महत्या जैसा चरम कदम भी उठा चुके हैं।

पहले उन्हें दर्जनों कॉल कर परेशान किया जाता है। फिर उनके परिवार के सदस्यों को फोन कर धमकाया जाता है और गालियां दी जाती हैं। इसके बाद भी अगर कोई लोन नहीं चुका पाता तो उसके कॉन्टैक्ट लिस्ट के लोगों, दोस्तों को फोन कर, उन्हें व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर ग्राहक को अपमानित किया जाता है।

यही नहीं प्रताड़ना के लिए उसकी पर्सनल जानकारी भी सोशल मीडिया पर साझा कर दी जाती है. उन्हें चीटर बताया जाता है। उनके यहां फर्जी लीगल नोटिस भेजी जाती है।

यही नहीं कई ऐप तो लोन देने के पहले ही प्रोसेसिंग फीस और जीएसटी के नाम पर बड़ी रकम काट देते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई 5 हजार रुपये का लोन ले रहा है तो उससे प्रोसेसिंग और जीएसटी के नाम पर 1180 रुपये तक की रकम काटकर महज 3,820 रुपये दिए जाते हैं।

प्रताड़ना के तरह-तरह के तरीके 

[  ] समय पर नहीं भरा तो कई गुना पेनाल्टी लगाएंगे 

[  ] किस्त न चुकाने पर डेली 3000 रुपए तक की पेनल्टी लगा देते हैं 

[  ] किस्त नहीं दी तो लोन लेने वाले की फोटो सार्वजनिक कर देते हैं 

[  ] पर्सनल डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर देते हैं 

[  ] उनको फोन कर तरह-तरह की गालियां देते हैं 

[  ] कर्जदार के कॉन्टैक्ट लिस्ट के लोगों को फोन कर उसे बदनाम कर देते हैं

[  ] परेशान होकर कर्ज लेने वाले कई लोग जान दे देते हैं।

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