क्या आपकी कुंडली में भी है राजयोग?

रिपोर्ट :- कशिश

नई दिल्ली :-कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों की चाल से जातक के वर्तमान और भविष्य का पता चलता है। कुंडली में नौवें स्थान को भाग्य और दसवें भाव को कर्म का स्थान माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के नौवें और दसवें स्थान पर ग्रहों की स्थिति सही होने पर राजयोग बन सकता है। कहते हैं कि जिस व्यक्ति की कुंडली में राजयोग बनता है उसे सभी सुख प्राप्त होते हैं।

मेष लग्न की कुंडली में अगर मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह नौवें और दसवें भाव में होते हैं तो यह स्थिति कुंडली में राजयोग का निर्माण करती है।

वृष राशि के जातक की कुंडली में नौवें और दसवें भाव में शुक्र और शनि ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं। ऐसे में जातक की कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है।

मिथुन लग्न की कुंडली में जब बुध और शनि ग्रह 9वें और 10वें भाव में एक साथ होते हैं तो कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है। ऐसे लोग राजा के समान जीवन जीते हैं।

कर्क लग्न वाले जातकों की कुंडली में जब चंद्रमा और बृहस्पति भाग्य और कर्म भाव में होते हैं तो यह राजयोग का कारक होता है। ऐसे लोगों के पास किसी चीज के कमी नहीं रहती है।

सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य और मंगल नौवें और दसवें भाव में अच्छी स्थिति में होते हैं तो कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है।

कन्या लग्न के जातकों की कुंडली में जब बुध और शुक्र भाग्य और कर्म भाव में एक साथ विराजमान होते हैं तो राजयोग का निर्माण होता है।

तुला लग्न के लोगों की कुंडली में शुक्र और बुध नौवें और दसवें भाव में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के सुख मिलते हैं।

वृश्चिक लग्न वालों की कुंडली में अगर सूर्य और मंगल ग्रह नौवें और दसवें स्थान पर एक साथ होते हैं तो राजा के समान सुख प्राप्त करता है। कुंडली में चंद्रमा और मंगल के मजबूत स्थिति में होने पर शुभ फल की प्राप्ति के योग बनते हैं।

धनु लग्न वालों के लिए बृहस्पति और सूर्य अगर नौवें या दसवें भाव में एक साथ होते हैं तो इस स्थिति में कुंडली में राजयोग बनता है।

मकर लग्न के जातकों की कुंडली में जब शनि और बुध एक साथ कर्म या भाग्य भाव में मौजूद होते हैं तो कुंडली में राजयोग कारक बनता है।

कुंभ लग्न जातकों की कुंडली में जब शुक्र और शनि ग्रह भाग्य और कर्म भाव में उपस्थित होते हैं तो ऐसे लोगों का जीवन राजा के समान बीतता है।

मीन लग्न के लोगों की कुंडली में जब गुरु और मंगल नौवें और दसवें भाव में एक साथ उपस्थित होते हैं तो यह स्थिति राजयोग बनाती है।

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